

दिव्य चेतना सत्संग के संस्थापक एवं संचालक परमहंस स्वामीनन्द जी महाराज हैं। दिव्य चेतना एक ईश्वरीय प्रेरणा है। इसका चयन एक ईश्वरीय आदेश के तहत हुआ है । हमारे अन्दर एक दिव्य चेतन सत्ता कार्य कर रही है । इसकी दिव्यता से हर वस्तु दिव्य हो जाती है। दुःख भी दिव्य होकर सुख और आनन्द में बदलने लगता है। इसकी जागृति हर मानव के लिए आवश्यक है। यही हमारा लक्ष्य है।
2.यह सत्संग एक गुरु प्रधान सत्संग है।
3. सत्संग का उद्देश्य:-
नैतिक उत्थान और मानव धर्म का प्रचार
4. सत्संग की उपलब्धि:-
निर्भीकता, क्षमा, दया, करुणा जैसे ईश्वरीय गुण का अवतरित होना।
5. यह सत्संग घर परिवार को छोड़कर भागने का संदेश नहीं देता। यह सत्संग अपने गृहस्थी में रहते हुए सारे जिम्मेवारियों को निभाते हुए अपने चेतना का विकास करने का संदेश देता है।
5. इस सत्संग का कोई अपना फंड नहीं है। सत्संग आयोजन के लिए किसी प्रकार का रसीद काटना या चंदा इकट्ठा करना मना है। अगर कोई स्वेच्छा से सहयोग देना चाहता है तो उसे स्वीकार भी किया जाता है।